गोल्ड-सिल्वर रेश्यो अगस्त में 72 से गिरकर 65 पर आ गया था, जो अब फिर बढ़कर 67 हो गया है। इसका मतलब है कि सोना स्थिर है और चांदी ज्यादा गिर रही है। लेकिन इस गिरावट का मांग (डिमांड) से कोई लेना-देना नहीं है। इंडस्ट्री की डिमांड 1-2 महीने में अचानक नहीं बदलती। आज चांदी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), सोलर पैनल और डेटा सेंटर्स में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रही है।
जनवरी में जब चांदी 120 डॉलर पहुंच गई थी, तब चीन की सबसे बड़ी कंपनी ने कहा था कि वे कॉपर (तांबे) जैसे सस्ते विकल्प की तरफ जाएंगे, लेकिन ऐसे बड़े बदलाव रातों-रात नहीं होते। आज भी चांदी बाजार में भारी डेफिसिट है। आगे चौथी तिमाही (Q4) आ रही है, और चाइनीज न्यू ईयर से पहले चांदी की फिजिकल और इंडस्ट्रियल डिमांड बढ़ना तय है।
सोने के मुकाबले चांदी ज्यादा टूटी। कमोडिटी मार्केट में चर्चा है कि क्या सोलर और इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्री में चांदी की मांग सुस्त हुई है या फिर इसकी जगह किसी सस्ती अल्टरनेटिव मेटल ने ले ली है? इस गिरावट के फंडामेंटल कारण क्या हैं?
