बुरहानपुर/इंदौर रिपोर्टर जावेद सिकन्दर अंसारी।
इंदौर, संभाग प्रतिनिधि। अनवर कादरी की लड़की आयशा चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। इम्तियाज बेलिम ने कोशिश की थी, आयशा के आने पर बाद पीछे हट गए। कागजी कार्रवाई शुरू हो गई है। आयशा दिल्ली में कानून की पढ़ाई कर रही थीं, पिता की राजनीति संभालेंगी। आयशा के मैदान में आने से भाजपा के लिए मुश्किल दिख रही है। इलाके में हिंदू और मुस्लिम वोटरों में मामूली अंतर है। एकतरफा वोट गिरे तो सीट फिर से कांग्रेस की होगी।
भाजपा की मुश्किल है कि सालभर के लिए खर्चा करने खातिर किसे उतारा जाए। सन्नी चौहान पहले ही हार चुके हैं, फिर से मैदान संभाला और आयशा ने पटक दिया तो दुकान मंगल हो जएगी। सीट अगड़ा है, विरोध होगा सो अलग।
गोलू शुक्ला ने नगर भाजपा टीम के अनीष पांडे को तैयारी के लिए कहा था, लेकिन मुहर नहीं लगाई है। हिंदू संगठन भी ताल ठोके हुए हैं। कहना है, कादरी को जेल हमने ही कराई है और उसी वजह से चुनाव हो रहे हैं।

तारीखों के ऐलान से गोलू नाराज हैं। विधायक को बताए बिना ही तय हो गई। गोलू की कोशिश थी कि उप-चुनाव के बिना मामला निपट जाए, क्योंकि कादरी परिवार के आने पर सीट निकालना मुश्किल हो जाएगा। सड़क के नाम पर टूट-फूट भी इतनी हो गई है कि इलाके में वोट मांगने के लिए जाना मुश्किल होगा। दोनों ही पार्टी के अलग-अलग नजरिया है ।ये चुनाव दोनों ही पार्टी के लिए गले की फांस है। देखना अब यह है कि मतदाता किसे जीत का सेहरा बांधते हैं? वही कुछ लोगों का मानना है कि आयशा कादरी का पल्ला भरी है।
